सरदारों पर चुटकुले ! (निक्की कहानी)

लो भाई… सुनो फिर एक और सरदारों वाला चुटकुला …. “एक सरदार के बारह बज गए………” (विनोद और उसके कुछ दोस्त आपस में मज़ाक कर रहे थे और अपने ही मित्र सभमीत सिंघ को चिड़ाने की कोशिश में लगे थे)

सभमीत सिंघ ने बड़े ही ठन्डे दिमाग से उनका बेहूदा और जातिवादी चुटकुला सुना और कहने लगा ….. “आपका धन्यवाद, जो आपने अपने आप को नीचा और हमें अपने से ऊंचा समझा”! एक चुटकुला और सुनाओ ऐसा !

विनोद और उसके दोस्त हैरान और परेशान दिखने लगे … आखिर उनसे रहा ना गया तो किशोर ने पूछ ही लिया … भाई हम तो तुम्हें जलाना चाहते थे पर तुम तो उल्टा प्रसन्न दिख रहे हो और उल्टा तुमने हमें ही कल्पा दिया !” विनोद भी कहने लगा … सभमीत भाई, कोई और सरदार होता तो अब तक कलप कर आग-बबूला हो गया होता, पर तुम ने तो सब उलटा दिया, जरा खोल कर समझाओ की तुमने इस तरह का जवाब क्यों दिया, “हम छोटे और तुम बड़े कैसे हो गए ?”

सभमीत सिंघ (हँसते हुए) : यारो, जब से दुनियां और समाज बना है, हमेशा से ही अपने से ऊंचे आदमी को ही सभी बुरा-भला कहते आये हैं ! देख लो किसी गरीब के बारे में कितनी कहानियां है ? जिस समय अपने से बड़े (धन, किरदार, धर्म या सामाजिक तौर पर) पर किसी का बस नहीं चलता तो अपनी खुलजी मिटाने के लिए बड़े (असल में आप उस समय खुद को नीचा दर्शा रहे होते हैं) के बारे में मज़ाक बनाना शुरू कर देते हैं… तुमने सुना नहीं की एक लोमड़ी का हाथ अंगूरों तक नहीं पहुंचा तो उस ने शोर मचा दिया कि “अंगूर खट्टे हैं!” अब जब तुम्हारा कोई बस नहीं चल रहा तो आप लोगों ने “एक सरदार था” जैसे दूसरों को नीचा दिखाने वाले चुटकुले बनाने की छिछोरी हरकतें करनी शुरू कर दी ! होना तो चाहिए था की समाज में हमें बराबर की जगह देते और प्यार बढ़ाते, क्योंकि बहु-संख्यकों का फ़र्ज़ होता है की अल्प-संख्यकों को जीने के लिए जगह दें, पर उस की जगह अगर टांगें खींचने की कोशिश करने लग जाएँ तो मेरे भाई, टकराव की स्थिति पैदा हो जाती है ! खुद जिओ… पर औरों को भी जीने दो, यही जिंदगी का राह है !

विनोद और किशोर ने आँखों नीची कर लीं और कहने लगे : हमें माफ़ कर दो भाई ! हम तो औरों की देखा-देखी ही इस प्रकार के दूसरों को नीचा दिखाने वाले चुटकुले सुनाते रहे… हमने कभी अपने गिरेबान में झाँक कर देखा ही नहीं की कभी हमारे ऊपर भी ऐसे जहरीले चुटकुले तुम बनाना शुरू कर दोगे तो क्या होगा ? पर धन्य हो तुम जो दिल बड़ा कर के हमें हमारी गलती समझाई !

सभमीत सिंघ : आओ चुटकुले बनायें … पर मीठे वाले … दिल खट्टे करने वाले नहीं ! दिलों में चुभने वाले नहीं बल्कि दिलों को फूलों की तरह हंसाने वाले ! (सभी गले मिलते है और भविष्य में ऐसे घटिया काम ना करने का प्रण लेते हैं !)

- बलविंदर सिंघ बाईसन