वास्तु चोर ! (निक्की कहानी)

वास्तु चोर ! (निक्की कहानी)
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आज रात इस घर में चोरी करेंगे ! दस-पन्द्रह मिनट में ही हमारा काम हो जायेगा और धन-जेवर हमारे हाथ में होंगे ! मैंने रेकी कर ली है, पिछले पांच दिनों से यह परिवार बाहर गया हुआ है ! (चोर किशोर ने अपने साथी मनोज को बताया)

इतनी जल्दी चोरी कर लोगे ? तुम तो इस घर के विषय में कुछ जानते ही नहीं! इतना बड़ा घर है, कहाँ कहाँ ढूँढोगे पैसा-जेवर ? (मनोज ने पूछा)

किशोर (हँसते हुए) : "खग जाने खग ही की भाषा !" मैं उस घर में कभी नहीं गया पर मैंने नोट कर लिया है की यह घर वास्तु के हिसाब से बना है और वास्तु के चिन्ह घर के बाहर से ही देखे जा सकते हैं ! मैंने ख़ास तौर पर वास्तु का कोर्स किया है तांकि चोरी करने में आसानी हो सके ! अब मुझे पता होता है की वास्तु के हिसाब से घर की किस दिशा में धन-जेवर हो सकते हैं !

मनोज (सुर से सुर मिलाते हुए) : "भेड़ जहाँ जायेगी, वहीं मुँडेगी !" जनता के वहम-भ्रम का फायदा अब हम चोर-ठग नहीं उठाएंगे तो कौन उठाएगा ? कौन समझाए ऐसे लोगों को की अच्छे वास्तुविद की बजाए अच्छे अलार्म सिस्टम का इंतजाम करना चाहिए !

किशोर : अपने काम की जानकारी हो तो कार्य आसान और मजेदार हो जाता है ! "आस पराई जो तके जीवित ही मर जाए ! वहम-भ्रम के भरोसे जो जिए, उसका खजाना चोरी हो जाए !" हम हैं, चोर चोर मौसेरे भाई ! (दोनों जोर जोर से हँसते हैं)

- बलविंदर सिंघ बाईसन