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ਹਰ ਜ਼ਿੰਦਗੀ ਹੈ ਇੱਕ ਨਿੱਕੀ ਕਹਾਣੀ
Balvinder Singh Bison

गाना-ए-दर्द ! (निक्की कहानी)

तेरे में इतना भी शऊर और ज्ञान नहीं है की आज धर्म की जो हानि हो रही है, उसके पीछे तेरे जैसे लोग भी है जो आँखें बंद कर शांत बैठे हैं ? तू हर बात को गाने गा गा कर हंसी में उड़ा देता है ! (पार्क की बेंच पर बैठे रणजीत सिंघ ने हरजीत सिंघ से कहा)
हरजीत सिंघ : जाने वो कैसे लोग थे जिनके, प्यार को प्यार मिला, हमने तो जब कलियाँ माँगी, काँटों का हार मिला... (साधू स्वभाव वाले लोग आजकल मुश्किल से ही मिलते हैं, वर्ना नफरत फैलाने वाले लोग धर्म के बाग़ में भी केवल कांटे ही बांटते हैं)
रणजीत सिंघ : तुम्हारा वहम है, कल ही धार्मिक नेता आये थे और उन्होंने इन्साफ दिलवाने का वायदा किया है ! तुम्हें सुना नहीं था क्या ?
हरजीत सिंघ : कसमे वादे प्यार वफ़ा सब, बातें हैं बातों का क्या ! कोई किसी का नहीं ये झूठे, नाते हैं नातों का क्या ! कसमे वादे प्यार वफ़ा सब, बातें हैं बातों का क्या.... (इन नेताओं के झूठे वादे जो केवल वोट या नोट लेने तक ही सीमित होते हैं, उन पर यकीन करना मतलब जान बूझ कर आँखें बंद करना)
रणजीत सिंघ : हो सकता है की उन्होंने कोई एक आध वादा पूरा ना किया हो पर इसका मतलब यह तो नहीं की तुम अपना दिल छोटा करो ?
हरजीत सिंघ : दिल ऐसा किसी ने मेरा तोड़ा, बरबादी की तरफ ऐसा मोड़ा ! एक भले मानुष को, अमानुष बना के छोड़ा ... (नहीं भाई, आज तक किसी भी नेता ने अपना ऐसा कोई वादा पूरा नहीं किया जिस में उस नेता का अपना कोई फायदा ना हो.. हम परेशान हो चुके हैं)
रणजीत सिंघ : इतना नकारात्मक मत सोचो .. उनकी भी पार्टी की तरफ कोई जिम्मेदारी हो सकती है !
हरजीत सिंघ : इसीलिए तो ..... तेरी दुनिया से हो के मजबूर चला ! मैं बहुत दूर, बहुत दूर, बहुत दूर चला ! ..... और .... आज पुरानी राहों से, कोई मुझे आवाज़ न दे ! दर्द में डूबे गीत न दे, गम का सिसकता साज़ न दे.... ! (हम इन्हें परख परख पर परेशान हो चुके हैं, अब हम और बर्दाश्त नहीं कर सकते)
रणजीत सिंघ : अरे वो भी तो मनुष्य मात्र हैं, कोई भगवान तो नहीं की एक दिन में ही तुम्हारी सारे दिक्कते दूर कर देंगे ?
हरजीत सिंघ : पत्थर के सनम, तुझे हमने मोहब्बत का खुदा जाना ! बड़ी भूल हुई अरे हमने, ये क्या समझा, ये क्या जाना ! (हमने तो हमेशा ही विशवास किया था इन नेताओं पर, परन्तु इन्होने हमेशा ही हमें धोखा दिया है !)
रणजीत सिंघ : अरे उन्हें सभी पार्टियों और धर्मों के लोगों को साथ ले कर चलना पड़ता है ! अब तुम क्या जानों उनकी मजबूरियां ?
हरजीत सिंघ : वोट बैंक के लिए ................. ग़ैरों पे करम अपनों पे सितम, ऐ जान-ए-वफ़ा ये ज़ुल्म न कर ! रहने दे अभी थोड़ा सा धरम, ऐ जान-ए-वफ़ा ये ज़ुल्म न कर !
रणजीत सिंघ : जिहाल-ए-मस्ती मकुन-ब-रन्जिश, बहाल-ए-हिज्र बेचारा दिल है ! सुनाई देती है जिसकी धड़कन, तुम्हारा दिल या हमारा दिल है ! (अरे मैं भी तुम्हारी तरह गाने में जवाब देने लगा, तुम्हारी संगत में मैं भी बदलने लगा हूँ और तुम्हारे दिल का दर्द भी समझने लगा हूँ !)
हँसते गाते अपने घरों की राह पर चल पड़ते हैं !
- बलविंदर सिंघ बाईसन

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