कमजोर कड़ी ! (निक्की कहानी)
चलो ले आओ कोका-कोला ! सारे मिल कर पियेंगे ! (राजेन्द्र प्रसाद द्वारा की जा रही भूख-हड़ताल के दौरान बाहर से आया अनिल वहां मौजूद लोगों से कह रहा था! )
सुरेश : अरे भाई, क्या कर रहे हो ? एक तरफ तो अपनी अच्छी बात मनवाने के लिए हमारे भाई भूख हड़ताल पर बैठे हैं और दूसरी तरफ तुम बजाये उनके साथ बैठने के, उल्टा यहाँ पार्टी का माहोल बना रहे हो ?
अनिल (कुटिल हंसी हँसता हुआ) : फिर क्या हुआ ! जो साथ बैठे है, उनको तो हक़ है अपनी सेहत सही रखने का ! एक एक ग्लास पेप्सी-कोला पी लेंगे तो क्या बिगड़ जाएगा ! चलो चलो भाई खोलो बोतल ! (कहते हुए फटाफट एक बोतल खोलने की कोशिश करता है)
सुरेश : किसी भी मुहीम को कमजोर या ख़तम करते के लिए अक्सर कमजोर कड़ी उसी मज़बूत चेन में से खोजी जाती है, जो आखिरकार उस पूरी चेन की मजबूती पर एक सवालिया निशान लगा देती है ! कृपया आप यह पेप्सी-कोला उठाइए और भूख-हड़ताल टूटने के बाद चाहे जितने पिला देना !
अनिल : अरे आप भी ना ! कैसी बातें कर रहे हैं ! हम क्या दुश्मन है राजेन्द्र प्रसाद जी के ?
सुरेश (थोड़े सख्त शब्दों में) : हम पूरी निष्ठा से इस भूख हड़ताल को पूरा करेंगे और अपने लक्ष्य को पाकर ही दम लेंगे ! आप कृपया अपना ये पार्टी का सामान उठाइए और हमें अपना काम करने दीजिये ! हमें किसी भी पल में कोई कमजोर कड़ी नहीं चाहिए ! जिसने पीना होगा तो अपने घर जा कर पी लेगा !
हुंह ... अनिल बुरा सा मुंह बना कर चला जाता है !
राजेंद्र प्रसाद और उसके साथी अपने लक्ष्य के प्रति पूरी इमानदारी से अपनी भूख-हड़ताल जारी रखते हैं !
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