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Balvinder Singh Bison

राष्ट्रिय खेल - रोड रेज ! (निक्की कहानी)


अँधा है क्या बूढ़े ? तेरी तो एक्सपायरी हो चुकी है, मुझे तो जी लेने दे ? (स्कूटर से कार की मामूली सी टक्कर के बाद गुस्से में मनोज ने कार से उतारते हुए बेसबाल का डंडा निकाल लिया)

बेटा गलती किसी से भी हो सकती है ! लड़ाई में क्या रखा है ? (कहते हुए बजुर्ग ने अपने सर से हेलमेट उतर दिया)

दादा जी, आप ? (बजुर्ग मनोहर लाल की शक्ल देखते ही मनोज के कठोर शब्द पिघलने लगे)

क्यों, अब नहीं मारेगा मुझे अपने मशहूर डंडे से ? पता नहीं भारत देश में कोई बेस-बाल खेलता भी नहीं पर बेसबाल के डंडों का सब से ज्यादा इस्तमाल हम भारतीय ही कर रहे हैं ! मेरे पास तेरी बहुत सी शिकायतें आईं की तू मामूली बातों पर भी आप खो देता है ! इसीलिए आज मैं जानबूझ कर तेरी गाडी के आगे आया था ! (मनोहर लाल ने अपनी बात रखते हुए कहा)

मनोज (शर्म से) : गलती हो गयी दादा जी ! (डंडा कार में वापिस रख देता है)

मनोहर लाल (प्यार से) : बेटा ! सड़क पर चलते हुए कुछ भी हो सकता है ! गलती किसी से भी हो सकती है ! हज़ारों लाखों गाड़ियाँ चलती हैं तो कहीं भी छोटी मोटी खरोंच या टक्कर लग सकती है ! एक छोटी सी मुस्कराहट या एक प्यार भाई क्षमा याचना से जो लड़ाई ख़तम हो सकती है उसको बड़ा क्यों करना ? अगर कोई पांच सेकंड भी ज्यादा रोड पर खड़ा हो गया तो पीछे से हॉर्न पर हॉर्न मारने से क्या हो जाएगा ? अरे भाई, वो आदमी सड़क पर घर बनाने तो आया नहीं है !

पर गुस्सा तो आ ही जाता है ना दादा जी !

अगर गुस्सा आ भी जाए तो अपने सम्मुख व्यक्ति को अपना भाई, पिता, माता, मित्र समझ लिया करो, फिर देखना गुस्सा कैसे गायब होता है ! किसी से डरो नहीं पर किसी को डराओं भी नहीं ! प्यार के दो बोल मित्रता के राह खोल देते हैं ! अगर ज्यादा बड़ा नुक्सान हो भी गया तो इन्शुरन्स किस खेत की गाज़र है ? वैसे भी किसी को पीटने से कौन सा नुक्सान की भरपाई हो जाती है ? याद रहे "गलतियाँ पलों से होती हैं, भुगतना सदियों को पड़ता है" ! सिर्फ हमारे देश में ही हज़ारों लोग रोज़ रोड-रेज में हर साल मारे जाते हैं !

मैं अपने गुस्से पर काबू रखने की पूरी कोशिश करूँगा दादा जी ! मुझे आपकी बात समझ आ गयी है और उम्मीद है की कहानी पढने वाले मित्रों को भी समझ आ गया होगा ! (बेसबाल का डंडा मैं अब सिर्फ खेलने के लिए इस्तेमाल करूँगा ना की किसी को पीटने के लिए)

वैसे जितना ज्यादा यह बेसबाल का बैट बिकता है, उस हिसाब से तो "रोड-रेज को राष्ट्रीय खेल" घोषित कर देना चाहिए ! (मनोहर लाल ने हँसते हुए कहा)

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