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Balvinder Singh Bison

घड़ियाल और नेता ! (निक्की कहानी)


(शैलेंदर अखबार पढ़ रहा था) दंगा-ग्रस्त इलाके में जनता का दर्द देख कर नेता जी रोये ज़ार-ज़ार ! जानियें क्यों निकलते हैं है घड़ियाल के आंसू ?

अबे क्या पढ़ रहा है ? (विक्रांत ने टोका)

हडबडा कर शैलेंदर ने अखबार दोबारा देखा और माथे पर हाथ मारते हुए बोला : यार ! यह अखबार वाले भी ना, दो कालम में गैप इतनी पास पास रखते हैं की खबरे मिक्स हो जाती है !

खैर ! मिक्स भी शानदार हुई हैं ! जो घड़ियाल के आंसू रो सके वही नेता कहलाता है ! जो पूरा साल जंगल के जंगल कटवा डाले पर पर्यावरण दिवस पर कैमरों की चमक-धमक में एक पौधा लगा कर वाहवाही लूटे वो नेता ! जो हर धर्म के प्रोग्राम में एकता की गीत गाये फिर फिर उन्हीं के खिलाफ दंगे भड़कवाये वो नेता ! और फिर उन दंगों के बाद वो नेता क्या करता है वो तो तुमने खुद ही अखबार के दो कालम मिक्स कर के पढ़ लिया है ! (विक्रांत ने कहा)

शैलेंदर : भाई ! तुझे मरने का शौंक है तो मर ! मुझे क्यों अपनी कहानी में घसीट के "घड़ियाल के मुंह में फेंक रहा है?"

विक्रांत (हँसते हुए) : घड़ियाल नहीं नेता !

शैलेंदर : लानत है !