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Balvinder Singh Bison

सेवा करत होए निहकामी ! (निक्की कहानी)

यहाँ से आगे हो जा भई ! धर्म स्थान पर सेवा कर रहे सेवाराम को धकेलते हुए दिखावाराम ने कहा !

सेवाराम : अरे भाई ! धक्का क्यों देते हो ? सेवा ही तो कर रहा हूँ, आप भी कर लो !

तूने मुझे पहचाना नहीं ! मैं इस पवित्र स्थान पर पिछले 25 साल से यही सेवा कर रहा हूँ ! अब हट जा और कोई और सेवा कार्य पकड़ ले ! (लगभग धक्का मारते हुए दिखावाराम गुस्से में आ गया)

"सेवा का अहंकार" सेवा को भी गन्दी राजनीति बना देता है ! सेवा करते करते तो मन की मैल कट जाती है ! मुझे अपने मित्र सर्वमीत सिंघ की कही बात याद आ रही है कि "काश हम गुरु की बात समझें "सेवा करत होए निहकामी तिस को होत प्राप्त स्वामी" ! जब हम निष्काम (निर्मल भाव से) सेवा करते है तो उसमें से परमेश्वर के गुण प्रगट हो जाते हैं !

(दिखावाराम की आध्यात्मिक अधोगति देख कर सेवाराम की आँखें नम थी ! दूसरी तरफ दिखावाराम अपनी पसंदीदा सेवा को वापिस पा कर विजेता की भाँती व्यवहार कर रहा था!)

- बलविंदर सिंघ बाईसन