A space for stories that matter

Every life hides a powerful story

Short stories, poems & fearless ideas

Balvinder Singh Bison

फ़ित्ना-गर ! (निक्की कविता)

हर गलती का जिम्मेदार वो हमे बना जाते है,
अपनी खता की सजा भी हमे ही सुना जाते है !

लब हमारे तहजीब में खामोश जाते है अक्सर,
वो हर वाह-वाह पर अपना हक जता जाते है !

जिंदगी उनकी शुरू खुद पर, खत्म खुद पर,
दूसरों को दफनाने का सामान किये जाते है !

उनकी लगाई आग घरों में, ना कोई बुझा पाए,
वो तमाम पानी के तालाब सुखाये जाते है !

इत्तिफ़ाक़न फ़ित्ना-गर नेता की चालों का हुआ इल्म,
आब-ए-हयात कह आब-ए-तल्ख़ पिलाये जाते है !

- बलविंदर सिंघ बाईसन

फ़ित्ना-गर = mischievous (फितना-गर)
आब-ए-तल्ख़ = bitter water