धर्म अधर्म (निक्की कविता)
कल आँगन से पानी भरने पर गरीब की बांह को जिसने ऐंठा !
आज गुरु के नाम पर ठन्डे मीठे पानी की, छबील लगाए बैठा !
** केवल पढने वाले कृपया शांत रहें, पढ़ कर विचार करने वाले कमेन्ट कर सकते हैं !
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कल आँगन से पानी भरने पर गरीब की बांह को जिसने ऐंठा !
आज गुरु के नाम पर ठन्डे मीठे पानी की, छबील लगाए बैठा !
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