भीड़तंत्र ! (निक्की कहानी)

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आपके विचार में भीड़तंत्र का पोषक कौन है ? (जज ने पूछा)

भीड़तंत्र का पोषक "चीख-तंत्र" है ! (वकील ने बताया)

जज : आप कहना क्या चाहते हैं ?

वकील : माई-लार्ड ! आज कल न्यूज़-चैनल के एंकर (पता नहीं कौन से दबाव में) चीख चीख कर जनता को भड़का रहे हैं ! हर खबर को नेताओं के पैसों के ढेर पर चढ़ कर चीख-चीख कर बहुत ही गलत तरीके से प्रस्तुत किया जाता है ! खबर को इस प्रकार दिखाया जाता है की एक सम्प्रदाय विशेष के खिलाफ नफरत का माहौल बनाया जा सके ! राजनितिक एवं धार्मिक नफरत को स्टेज प्रदान कर रहे हैं आज के बहुत से बिकाऊ न्यूज़-चैनल ! अगर आप इन बिके हुए एंकर्स के चेहरे न्यूज़ बोलते हुए ध्यान से देखें तो आपको भूखे शिकारी कुत्ते का चेहरा दिखेगा जो अपने मालिक के लिए शिकार करने को तैयार है !

जज : वकील साहिब ! आप कुछ ज्यादा ही भावुक हो गए हैं ! खैर, मैं आपका दर्द समझ रहा हूँ, पर थोड़े नरम शब्दों का चुनाव कीजिये !

वकील : आज के न्यूज़-चैनल और उनके एंकर किसी ना किसी राजनितिक या धार्मिक दबाव और लालच में "देश की सदभावना के दूध में नफरत की काली कांजी डाल रहे हैं" !

जज : हाँ, यह शब्द नरम हैं ! कोर्ट की कार्यवाही लंच के लिए मुल्तवी की जाती है !

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