देश का हाल ! (निक्की कविता)

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एकता कि मिसाल देने वाले खुद अन्दर से खण्डित है !
अज्ञानता के महान पिण्ड आज कहलवाते पण्डित हैं !
दुष्ट नमक-हराम हैं हमप्याला, शरीफ तो कम्पित हैं !
आम आदमी पल में फांसी, नेता के केस लम्बित हैं !

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