धर्म अधर्म (निक्की कविता) 31 May 2016 Nikki Kavita Share this story: Facebook WhatsApp X Share… Copy Link A− A+ कल आँगन से पानी भरने पर गरीब की बांह को जिसने ऐंठा ! आज गुरु के नाम पर ठन्डे मीठे पानी की, छबील लगाए बैठा ! ** केवल पढने वाले कृपया शांत रहें, पढ़ कर विचार करने वाले कमेन्ट कर सकते हैं ! - बलविंदर सिंघ बाईसन ❤️ Like 0 Likes Leave a Comment Post Comment Reader Comments ← Previous Story Next Story →
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