मतवाली गाली ! (निक्की कहानी)
मैंने एक बात नोट की है कि तुमनें गालियाँ देनी बंद कर दी हैं ! पहले तो बात बात पर तुम्हारी जुबान से फूल झड़ते थे ?
समय समय की बात है ! पहले मैं गाली देने से पहले सोचता नहीं था और एक दम प्रतिक्रिया करते हुए गाली निकल जाती थी ! अब मैं दो काम करता हूँ !
वो क्या ?
पहला तो मैं गाली देने से पहले एक मिनट चुप हो जाता हूँ, इस से अस्सी प्रतिशत गाली देने की नौबत ही नहीं आती ! और अगर तब भी कसर बची हो तो मैं अगर बहन की गाली निकल रही है तो उसकी बहन की जगह अपनी बहन को रख कर सोचता हूँ ! फिर गाली निकलती ही नहीं ! काम है तो दोनों ही मुश्किल पर करते करते आदत पकती जा रही है ! गुस्सा तो होता हूँ पर शब्दों में गाली नहीं आती !
वाह ! सभी इस प्रकार सोच लें तो समाज बदलते समय नहीं लगेगा !