फरमाइशी नारा ! (निक्की कहानी)

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यार, कुछ हंगामें बाज़ी वाली फोटो भी हो जाती तो जनता में हमारा भी अक्स झुझारू बन जाता ! वो दूसरी पार्टी के नेता के कल के धरना-पर्दर्शन में फोटो खूब लग रहे थे (अखबार में अपनी फोटो देखते हुए नेता जी ने कहा)

चिंता मत करो नेता जी ! ऐसी फोटो खींचेंगे इस बार की आप भी याद रखियेगा ! भईया जी ! स्माइल ! (फोटोग्राफर ने खींसे-निपोरते हुए कहा)

कुछ दिनों बाद धरना रख लिया गया .......

जनता को इन्साफ चाहिए ! अपने पद से इस्तीफ़ा दो ! गुंडागर्दी नहीं चलेगी ! आधा घंटा बेरिकेड के पास नारे-बाज़ी चलती रही, बेरिकेड हिलाए जाने लगे ! पुलिस वाले मूक-दर्शक बने नारेबाजी को देख रहे थे, उनके चेहरों पर आराम के भाव थे क्योंकि नेता जी ने तो पहले ही थाने में सेटिंग की हुई थी और वायदा किया था की उनके कार्यकर्त्ता बेरिकेड गिराएंगे और फिर पुलिस उन्हें बसों में भर कर थाने ले जायेगी जहाँ से एक घंटे बाद उन्हें छोड़ दिया जाएगा !

पानी की धार छोड़ने के बाद पुलिस ने धर-पकड़ शुरू कर दी ! कार्यकर्त्ता तितर-बितर होने की जबरदस्त एक्टिंग करने लगे ! नेता जी ने मौका देख कर बीच मैदान में नारेबाजी शुरू कर दी ! फ़्लैश .. फ़्लैश .. फ़्लैश .. फोटोग्राफर कंगारू के तरह कूद-कूद कर फोटो खींचने लगा ! इतने में ही छह-सात पुलिस वालों ने आ कर नेता जी को पकड़ लिया और बस की तरफ खींचने लगे !

नेता जी ने हाथ उठा कर एक फ़रमाइशी नारा लगाया और बड़ी उत्सुकता से फोटोग्राफर की तरफ देखा ! इस आपा-धापी में भी नेता जी जिंदाबाद के नारे गूँज रहे थे !

क्लिक ... क्लिक... क्लिक ! फरमाइशी पोज़ कैमरे में कैद हो गए अगले दिन के अखबारों की सुर्खियाँ बनने के लिए !

किसी का ध्यान नहीं गया की कार्यकर्ताओं के कपड़े तार तार थे पर नेता जी के कपडे ऐसे चमक रहे थे जैसे अभी सर्फ़-एक्सेल से धोएं हो !

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