अर्थ अनर्थ ! (निक्की कहानी )
दादी ने पोते से कहा,
“बेटा, बाजार से चिकनकारी वाला कुर्ता ले आना।”
पोता मोबाइल में लगा था। बोला,
“दादी, ये चिकनकारी क्या होती है?”
दादी ने समझाया,
“कपड़े पर बारीक कढ़ाई का काम… बहुत पुरानी कला है।”
पोता बोला,
“ओह! मुझे तो लगा चिकन की कोई कारीगरी होगी!”
दादी ने माथा पकड़ लिया : “अरे बेटा, चिकनकारी में चिकन नहीं, कारीगरी है!”
पोता हँसकर बोला,
“दादी, आजकल शब्द पूरे कहाँ पढ़ते हैं…
दो टुकड़े दिखे और अपना मतलब बना लिया!”
दादी बोली : “बस बेटा, यही तो है ‘अर्थ अनर्थ!’
कल को ‘गुलाब जामुन’ देखकर कोई पूछ बैठे—
‘दादी, गुलाब तो समझ आया… ये जामुन इसमें क्यों डाल दिया?’”
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