टाइम नहीं है भाई ! (निक्की कहानी)

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टाइम नहीं है भाई ! नौकरी करने के लिए रोज़ 40 किलोमीटर जाना पड़ता है ! माना की मुद्दा ठीक है पर हम नौकरी पेशा लोग कैसे भाई साहिब जी की हिमायत में इन भूख-हडतालों, धरनों और मार्च में भाग ले सकते हैं ? नौकरी क्या और नखरा क्या ? बॉस छुट्टी नहीं देता भाई ! (गुरमीत सिंघ ने अपनी बात रखते हुए कहा)

बलविंदर सिंघ : जहाँ चाह वहां राह ! कोई तो तरीका होगा भाई ? आओ अपने मित्रो से बात करते है जो तुम्हारी तरह ही नौकरी पेशा हैं ! शायद कोई राह निकल जाए !

(बलविंदर सिंघ अपने कुछ मित्रो को फोन लगाता है और स्पीकर फोन पर मानवाधिकार के मुद्दे पर भाई साहिब सिंघ द्वारा शुरू की गयी भूख हड़ताल के बारे में उनके विचार मांगता है)

पहला मित्र बलजीत सिंघ कहता है की हम लोगों ने तो लोगों को जागरूक करने के लिए "अपने बाजू पर काला कपडा बाँध लिया है" ! जब भी कोई इस बारे में पूछता है तो हम सारी कहानी बता देते हैं !

दुसरे मित्र सुखदीप सिंघ को फोन करने पर उनका कहना था की मैं रोज़ दिल्ली से गुडगाँव का तकरीबन 40 किलोमीटर का रास्ता तय करता हूँ ! मैं तो आफिस जाते और आते वक्त दिल्ली के बोर्डर पर स्थित "टोल प्लाज़ा" पर अपनी गाडी रोक कर वहां से गुज़र रहे वाहनों में पर्चे बाँट रहा हूँ ! रोज़ टोल प्लाजा पर हज़ारो गाडियां गुज़रती हैं ! नौकरी भी हो रही है और जागरूकता भी फैला रहा हूँ !

तीसरे मित्र मनमीत सिंघ ने फोन करने पर बताया की हम छह नौजवान अपनी कॉर्पोरेट नौकरी के साथ साथ पिछले 5 दिन से भूख हड़ताल पर हैं ! हम नौकरी भी कर रहे है और साथ साथ अपने आस पास के 1800 से ज्यादा लोगो को अब तक भाई साहिब सिंघ जी की भूख हड़ताल के बारे में बता चुके हैं !

गुरमीत सिंघ का चेहरा चमक उठता है और वो कहता है की मैं तो बेकार में ही परेशान हो रहा था ! हम सभी को अपने अपने तल पर जितनी हो सके, जागृति फैलानी चाहिए ! मैं भी कल से ही इस पर जुट जाता हूँ और अपने बाकी दोस्तों को भी इस बारे में जागरूक करूँगा !

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