बुलडोजर ! (निक्की कविता)
बुलडोजर चले हरी घास पर, नारंगी तालियां मारे ! अब आया नारंगी का नंबर, तब क्यों चीखें मारे ? बैसंतर देव पुकारें, जब लगे पड़ोसी के द्वारे ! बचाओ बचाओ चिल्लाएं, जब आग पहुंचे अपने द्वारे ! तू ना समझ मतवाली आग को किसी का भी...
बुलडोजर चले हरी घास पर, नारंगी तालियां मारे ! अब आया नारंगी का नंबर, तब क्यों चीखें मारे ? बैसंतर देव पुकारें, जब लगे पड़ोसी के द्वारे ! बचाओ बचाओ चिल्लाएं, जब आग पहुंचे अपने द्वारे ! तू ना समझ मतवाली आग को किसी का भी...
हर गलती का जिम्मेदार वो हमे बना जाते है,अपनी खता की सजा भी हमे ही सुना जाते है !लब हमारे तहजीब में खामोश जाते है अक्सर,वो हर वाह-वाह पर अपना हक जता जाते है !जिंदगी उनकी शुरू खुद पर, खत्म खुद पर,दूसरों...
एकता कि मिसाल देने वाले खुद अन्दर से खण्डित है !अज्ञानता के महान पिण्ड आज कहलवाते पण्डित हैं !दुष्ट नमक-हराम हैं हमप्याला, शरीफ तो कम्पित हैं !आम आदमी पल में फांसी, नेता के केस लम्बित हैं !...
कल आँगन से पानी भरने पर गरीब की बांह को जिसने ऐंठा ! आज गुरु के नाम पर ठन्डे मीठे पानी की, छबील लगाए बैठा ! ** केवल पढने वाले कृपया शांत रहें, पढ़ कर विचार करने वाले कमेन्ट कर सकते हैं ! #HindiPoetry #Poetry...
अपने मुंह बडबोले, पर हैं कान के कच्चे !अन्दर झूठ कपट अहंकार, बनते सच्चे !पंथक सुपरमैन उड़ते मनमती हवाओं में !खाकी निक्कर, ऊपर हैं सिख्खी कच्छे !जब जरूरत हों तो फेंकते बातों के लच्छे !खुद को बाप समझते, ...
आज तक जिसे भी भगवान् समझा,वही कच्ची मिटटी का बुत निकला !मोह माया से दूर रहो, जो था कहता,खुद गले तक डूबा लक्ष्मी पुत्र निकला !नशे शराब को जी भर भर था जो कोसता,कमरे में बोतल से एक घूँट कम निकला !जो देता...
वो तो कातिल है, उनसे इन्साफ की उम्मीद कैसी ?तुम ने भी अपना बन कर कौन सा तीर मार दिया ?कातिल से इन्साफ माँगना हमारी वक्ती मजबूरी है !तुम भी बस अपने बन कर भावनाओं से खेलते रहे !उसने हुकूमते दुश्मन बन नि...