पति-पत्नी! (निक्की कहानी)

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भगवान ने पति पत्नी को बनाया ताकि वो एक दूसरे के अधूरेपन को COMPLETE कर सकें और मिल कर अपने संसार को खूबसूरत बनाएं। (टी वी पर कार्यक्रम आ रहा था)

नवीन प्रोग्राम देखते हुए अलग ही दुनियां में खो गया, और सोचने लगा...

बहुत दुख हुआ होगा उस खुदा को जब पति-पत्नी ने उस COMPLETE में से "L" निकाल कर उसे L फार लड़ाई में बदल दिया और बाकी बचा COMPETE अपना कर एक दूसरे से ही प्रतिस्पर्धा करने लगे, और अपना प्यार गवां बैठे। जिन्हें दोस्त होना था वो प्रतिद्वंदी बन बैठे।

अरे किस सोच में डूबे हो, चाय ठंडी हो रही है। कल्पना ने नवीन को झंझोड़ कर उठाया।

अरे कुछ नहीं , टी वी पर बीवी के बारे में प्रोग्राम आ रहा था। क्या एक लड़का (पति) और लड़की (पत्नी) कभी दोस्त नहीं हो सकते ? क्यों उनमें अपनी अपनी प्रभुसत्ता को लेकर तलवारें खिंची रहती हैं?

तुम नहीं समझोगे हमारी फीलिंग। तुम मर्द लोग प्यार समझने के मामले में डब्बू होते हो।

अरे अरे अरे .... कहाँ ले जा रही हो बात को। सुनो, एक कविता सुनो

तुम कोमल ह्दय, हम ढीठ प्रिये !

तुम पापा की परी, हम प्रेत प्रिये !

तुम समंदर की सीप, हम रेत प्रिये !

तुम सुंदर बगिया, हम खेत प्रिये !

तुम रेलगाड़ी, हम आये चपेट प्रिये।

तुम रोडरोलर, हम लम्बालेट प्रिये।

तुम संग प्रीत हुई, हम हैं ग्रेट प्रिये।

खाना परोसो, हम कर रहे वेट प्रिये।

रहने दो तुम ! अपनी चिकनी चुपड़ी झूठी बातें । लाती हूँ खाना। (आंखें ततेरते हुए प्यार से कल्पना ने कहा)

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